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Madhepura News: मिड-डे-मील की खिचड़ी खाने के बाद 60 बच्चे बीमार, थाली में मरी छिपकली मिलने का दावा

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Alam Ki Khabar | Madhepura News | Bihar News | मिड-डे-मील की खिचड़ी खाने के बाद मधेपुरा के स्कूल में करीब 60 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, छात्रों ने भोजन में मरी छिपकली मिलने का दावा किया।

मधेपुरा, 9 अगस्त। बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे-मील की गुणवत्ता और व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मधेपुरा जिले के गम्हरिया प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय दाहा में शनिवार को खिचड़ी खाने के बाद करीब 60 बच्चों की तबीयत बिगड़ने से स्कूल से लेकर अस्पताल तक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बच्चों ने पेट दर्द, चक्कर और उल्टी-दस्त जैसी शिकायतें कीं। इसी बीच कुछ छात्रों ने परोसी गई खिचड़ी में मरी हुई छिपकली मिलने का दावा किया, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।

घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावक अपने बच्चों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गम्हरिया पहुंचे। बड़ी संख्या में बच्चों के अस्पताल पहुंचने के कारण कुछ समय के लिए वहां भी भीड़ और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। फिलहाल किसी गंभीर स्थिति की सूचना नहीं है।

बताया जा रहा है कि विद्यालय में शनिवार को बच्चों के लिए खिचड़ी तैयार की गई थी। भोजन परोसे जाने के बाद छात्रों ने खाना खाया। कुछ देर बाद बच्चों ने पेट में दर्द और चक्कर आने की शिकायत करनी शुरू कर दी। इसके बाद स्कूल में मौजूद शिक्षकों और रसोइया को इसकी जानकारी दी गई। मामला बढ़ने पर अभिभावकों को भी सूचना मिली और वे बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचने लगे।

घटना का सबसे गंभीर पहलू उन छात्रों का दावा है, जिन्होंने अपनी थाली में मरी हुई छिपकली मिलने की बात कही है। बच्चों के मुताबिक भोजन में इस तरह की चीज दिखाई देने के बाद उन्होंने स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका और रसोइया को इसकी जानकारी दी। आरोप है कि इसके बाद खिचड़ी को फेंक दिया गया और विद्यालय में छुट्टी कर दी गई।

हालांकि, भोजन में वास्तव में छिपकली मिली थी या बच्चों की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या रही, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए इस दावे को फिलहाल छात्रों और अभिभावकों के आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।

घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल और अस्पताल की ओर पहुंच गए। कई अभिभावकों ने स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बच्चों के भोजन में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है।

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका किरण कुमारी ने बताया कि बच्चों को खिचड़ी परोसी गई थी। उनके अनुसार, कुछ बच्चों ने घर जाने के बाद पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की। इसके बाद मामले की जानकारी सामने आई और बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

मामले की जानकारी शिक्षा विभाग तक पहुंचने के बाद विभाग ने भी संज्ञान लिया है। डीपीओ एमडीएम रवि शास्त्री ने बताया कि बच्चों की स्थिति सामान्य है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्कूल में बच्चों को परोसे गए भोजन की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई थी और भोजन तैयार करने तथा परोसने की प्रक्रिया में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। यदि भोजन में किसी बाहरी वस्तु की मौजूदगी की पुष्टि होती है तो यह बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही का मामला होगा।

सरकारी विद्यालयों में मिड-डे-मील का उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें पौष्टिक और सुरक्षित खाना देना भी है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए स्कूल का भोजन बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता में थोड़ी भी लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल सकती है।

मधेपुरा की इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में भोजन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोजन तैयार करने वाली जगह की साफ-सफाई, इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, खाना पकाने के दौरान निगरानी और बच्चों को भोजन परोसने से पहले उसकी जांच जैसे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं।

अभिभावकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। वहीं शिक्षा विभाग की ओर से जांच की बात कही गई है। अब जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों के बीमार पड़ने की वास्तविक वजह क्या थी और भोजन में मरी हुई छिपकली मिलने का दावा कितना सही है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल पहुंचाए गए बच्चों की हालत सामान्य बताई जा रही है। लेकिन घटना ने स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे-मील की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

जांच के बाद ही साफ होगी असली वजह

मिड-डे-मील से जुड़ी ऐसी घटनाओं में सबसे जरूरी है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले भोजन के नमूने और संबंधित परिस्थितियों की जांच की जाए। बच्चों की तबीयत बिगड़ने की वजह, भोजन की गुणवत्ता और कथित रूप से छिपकली मिलने के दावे की वास्तविकता जांच के जरिए सामने आनी चाहिए।

यदि भोजन में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। वहीं यदि जांच में कोई दूसरा कारण सामने आता है तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि अभिभावकों के बीच फैली आशंका दूर हो सके।

बच्चों के भोजन से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन को इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच जल्द पूरी करनी चाहिए। साथ ही जिले के दूसरे स्कूलों में भी मिड-डे-मील की गुणवत्ता और साफ-सफाई की व्यवस्था की समीक्षा करना जरूरी है।

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